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Jun 24, 2026 Soumya

तीस्ता परियोजना पर चीन-बांग्लादेश की बढ़ती नजदीकी, भारत की रणनीतिक चिंताएं बढ़ीं

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के चीन दौरे के दौरान तीस्ता नदी परियोजना एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। चीन और बांग्लादेश के बीच बढ़ते सहयोग को भारत की रणनीतिक नजर से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तीस्ता परियोजना पर चीन-बांग्लादेश की बढ़ती नजदीकी, भारत की रणनीतिक चिंताएं बढ़ीं
दक्षिण एशिया की राजनीति में इन दिनों तीस्ता नदी परियोजना को लेकर नई हलचल देखने को मिल रही है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के चीन दौरे के दौरान इस परियोजना पर संभावित चर्चा ने क्षेत्रीय कूटनीति को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन और बांग्लादेश के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर बातचीत चल रही है, जिनमें लंबे समय से लंबित तीस्ता नदी प्रबंधन और पुनर्विकास परियोजना भी शामिल है। बांग्लादेश इस परियोजना के लिए चीनी सहयोग को महत्वपूर्ण मान रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि तीस्ता नदी केवल जल संसाधन का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भारत और बांग्लादेश के संबंधों से जुड़ा एक संवेदनशील विषय भी है। यह नदी भारत के सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है, इसलिए इसके जल बंटवारे और विकास योजनाओं का असर दोनों देशों पर पड़ता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि चीन इस परियोजना में बड़ी भूमिका निभाता है तो दक्षिण एशिया में उसका प्रभाव और मजबूत हो सकता है। यही कारण है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।

तारिक रहमान का यह दौरा भी खास माना जा रहा है क्योंकि प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी शुरुआती महत्वपूर्ण विदेश यात्राओं में शामिल है। चीन में उनकी शीर्ष नेतृत्व से मुलाकातों और आर्थिक सहयोग से जुड़े कई समझौतों पर चर्चा की संभावना जताई गई है।

जानकारों का कहना है कि बांग्लादेश अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। एक ओर वह भारत के साथ रिश्ते मजबूत रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर चीन से निवेश और आधारभूत ढांचा परियोजनाओं में सहयोग भी बढ़ा रहा है।

तीस्ता जल विवाद कई दशकों से भारत और बांग्लादेश के बीच चर्चा का विषय रहा है। विभिन्न दौर की वार्ताओं के बावजूद अब तक स्थायी समझौता नहीं हो पाया है। ऐसे में परियोजना से जुड़े किसी भी नए कदम का क्षेत्रीय राजनीति पर असर पड़ सकता है।

फिलहाल दोनों देशों के बीच होने वाली बैठकों और संभावित समझौतों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि तीस्ता परियोजना को लेकर चीन, बांग्लादेश और भारत के बीच समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
Author - Soumya
Credit - World Desk

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